भारत के महान विद्वान आचार्य चाणक्य ने बताया है कि हमारे जीवन में वह कौन सी बातें हैं जो हमारे जीवन को नर्क बनाती हैं । चाणक्य नीति की ओर ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे चाणक्य की बताई गई अधिकतर बातें आज हमारे जीवन में लागू होती हैं। चलिए जानते हैं ऐसी पांच बातें जो हमारे जीवन को नर्क बनाती हैं।

यह पांच बातें नरक का दरवाजा खोलती हैं
यह पांच बातें नरक का दरवाजा खोलती हैं

पहला है अत्यधिक क्रोध करना। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अत्यधिक क्रोध करने वाला होता है उसे कभी भी शांति नहीं मिल सकतीवह अपने जीवन में हमेशा परेशान ही रहता है । गुस्सा करना कभी भी हमारी सेहत के लिए बेहतर नहीं होता इसका अंजाम ही हमेशा बुरा होता है । क्रोध करने से कोई भी बात नहीं बनती बल्कि बिगड़ जाती है। क्रोध करने वाले व्यक्ति का गुस्सा शांत हो जाता है तो उसे पछतावे के अलावा कुछ नहीं मिलता। जिस व्यक्ति को गुस्सा आता है उस व्यक्ति के साथ कोई भी व्यक्ति नहीं रहना चाहेगा और हर कोई उसे दूर ही रहता है।

यह पांच बातें नरक का दरवाजा खोलती हैं

दूसरा है दरिद्रता का होना। जिस व्यक्ति के घर में एवं स्वयं व्यक्ति दरिद्र होता है वह कभी भी खुश नहीं रह पाता हमेशा ही वह परेशान रहता है। दरिद्र आदमी जीता तो है पर एक जिंदा लाश की तरह होता है । वह व्यक्ति अपनी जिंदगी जीता नहीं बल्कि अपनी जिंदगी काटता है। जो व्यक्ति जन्मजात दरिद्र होता है उसका जीवन तो बेकार होता ही है पर कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो अपनी जिंदगी को दरिद्र बनाने में लगे रहते हैं । ऐसे लोग अपनी जिंदगी पर ध्यान नहीं देते और खुद को दरिद्रता की ओर धकेल देते हैं।

तीसरा है कड़वी वाणी बोलना। आजकल के समय में बच्चों को घर में वह संस्कार नहीं मिल पाते जिनकी उन्हें जरूरत होती है। वह संस्कार ही होते हैं जिससे एक बच्चा बड़ा होकर एक आदर्श नागरिक बनता है । संस्कारों में एक बात अहम होती है वह है कि दूसरों के साथ हमेशा ही मीठे शब्दों में बात की जाए और सभी से अच्छे से व्यवहार करें।

चौथा है नीच पुरुषों के साथ रहना । यहां नीच पुरुषों के साथ रहने का मतलब है कि ऐसे लोगों के साथ रहना जिनकी आदतें बुरी होती हैं और जिनके साथ रहकर आप बुरे बनते जा रहे हैं । आप अपने दोस्तों को भी देख ले और उनके बारे में सोचे अगर वह आपको अच्छे नहीं लगते तो उन्हें आज ही छोड़ दें। जैसी संगति में रहेंगे हमेशा वैसे ही बनेंगे आप चाहो या ना चाहो पर उनका असर होना स्वभाविक है ।

पाचवा है अपने सगे संबंधियों से बैर रखना । जब किसी इंसान का जन्म होता है तभी से वह किसी ना किसी रिश्ते से बंध जाता है। उसके साथ रिश्ते जुड़ते चले जाते हैं। अगर उसके जीवन में यह लोग ना हों तो उसको कभी भी जीने का मजा नहीं मिल पाएगा। हमारे रिश्ते हमारे जीने की बहुत बड़ी वजह होते है जिनसे हम जीने का आनंद लेते हैं।